ऋषि पंचमी पूजा क्या है और कैसे मनाते हैं I Rishi Panchami Puja Kya Hai Or Kaise Manate Hai

हिंदी पंचांग से मान्यता के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी कब मनाई जाती है इसी दिन ऋषि पंचमी का व्रत गणेश चतुर्थी के अगले दिन पड़ता है वर्ष 2022 के अनुसार ऋषि पंचमी का व्रत 1 सितंबर यानी गुरुवार को होगा इस पर्व के दिन ऋषि पंचमी के साथ दिन रिसीव की पूजा का विधान माना गया है

ऋषि पंचमी पूजा का विधि क्या है

ऋषि पंचमी का पूजा का विधि गंगा में स्नान करना शुभ माना जाता है अगर किसी कारण बस ऐसा संयोग नहीं बन रहा है तो घर नहा ले या गंगा जल मिलाकर स्नान करने से भी सारे पाप धुल जाते हैं

सबसे पहले 108 बार मिट्टी से हाथ धोए गोबर की मिट्टी तुलसी की मिट्टी पीपल की मिट्टी गंगा जी की मृत्यु गोपी चंदन तिल आंवला गंगाजल गोमूत्र इन चीजों को मिलाकर हाथ और पैर धोए जाते हैं और 108 बार भी पूरा किया जाता है इसके बाद नहा कर आप गणेश जी की पूजा की जाती है गणेश जी की पूजा करने के बाद सत्य शिव का पूजन और कथा भी पढ़ी जाती है

पूजा समाप्त होने के बाद दक्षिणा के तौर पर आप केला की जीवनी ब्राह्मण को दान किया जाता है,

ऋषि पंचमी व्रत कथा क्या है

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सीता स्वर नामक राजा ब्रह्मा जी से पूछा कि पितामह सबसे श्रेष्ठ और तुरंत फल देने वाला व्रत कौन सा है तत्पश्चात ब्रह्मा जी ने बताया कि सभी व्रतों में उत्तम और पापों का नाश करने वाला ऋषि पंचमी का व्रत माना गया है उनके आगे कहा कि हे राजन विदर्भ देश में एक उत्तम नगरी का सदाचारी ब्राह्मण आता था उसकी पत्नी का नाम सुशीला था जो कि वह पतिवर्ता दी थी ब्राह्मण के एक पुत्र और एक पुत्री थी पुत्री के विवाह के उपरांत वह विधवा हो गई और दुखी ब्राह्मण और उसकी पत्नी सुशीला अपनी पुत्री के साथ किनारे एक कुटिया में रहने लगे

फिर कुछ समय बाद एक दिन सोते समय ब्राह्मण ने देखा कि उसकी बेटी के शरीर पर कीड़े पड़ गए हैं तब ब्राह्मण उत्तम को ध्यान लगाने से पता चला कि उसकी बेटी पिछले जन्म में एक ब्राह्मण की पुत्री थी लेकिन रजस्वला के अनुसार वह पूजा के बर्तनों को छू लेती थी जिसके कारण कभी ऋषि पंचमी का व्रत भी नहीं किया था इस वजह से उसकी हालत हुई है फिर ब्राह्मण के बताए अनुसार उसकी पुत्री ने इस जन्म में कष्टों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने ऋषि पंचमी का व्रत और पूजन भी किया इस व्रत को करने से उत्तक की बेटी के दोष दूर हो गए थे और उसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिल गया तब से ऋषि पंचमी व्रत का शुभारंभ हुआ

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